Wednesday, 11 July 2018

चाय बेचने वाले की बेटी जाएगी इंडियन एयरफोर्स में, बधाई देने पूरा जिला घर पर उमड़ा

चाय बेचने वाले की बेटी जाएगी इंडियन एयरफोर्स में, बधाई देने पूरा जिला घर पर उमड़ा

चाय बेचने वाले की बेटी जाएगी इंडियन एयरफोर्स में, बधाई देने पूरा जिला घर पर उमड़ा
चाय बेचने वाले की बेटी जाएगी इंडियन एयरफोर्स में, बधाई देने पूरा जिला घर पर उमड़ा

हर तरह की बाधाओं को पार करके आखिरकार एक चाय बेचने वाले की बेटी ने वो कर दिखाया है जिसको सुनकर आज देश के हर नागरिक को उस पर गर्व है। मिलिए 24 साल की आंचल गंगवाल से जो मध्य प्रदेश के नीमच जिले से आथी है उनका भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की फ्लाइंग ब्रांच में चयन हुआ है। आंचल के पिता चाय बेचते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि वह वायुसेना की इस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली अपने राज्य से अकेली ही है।


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आईएएफ में शामिल होने के लिए उसे किसने प्रेरित किया?
आंचल का अपने परिणामों को आने के बाद कहना था कि उनको उत्तराखंड में 2013 बाढ़ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए बचाव अभियान ने काफी प्रेरित किय़ा। "जब मैं 12वीं क्लास में थी उत्तराखंड में बाढ़ आई थी और मैंने सशस्त्र बलों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में काम करते हुए टीवी पर देखा था जिसके बाद मैंने भारत की सेना में किसी ना किसी तरह से शामिल होने का फैसला कर लिया।


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एयर फोर्स की ये परीक्षा पास करना मेरे लिए आसान काम नहीं था-
परीक्षा के बारे में बोलते हुए, आंचल का कहना है कि इस परीक्षा में सफलता हासिल करना मेरे लिए कोई आम बात नहीं थी। रिपोर्टों के मुताबिक, आंचल इससे पहले 5 बार इसके लिए इंटरव्यू तक पहुंच चुकी है लेकिन अब जाकर 6वीं बार उनको सफलता हासिल हुई है।
एएफसीएटी परिणाम-


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इस बीच, आपको बता दें कि एयरफोर्स की इस प्रवेश परीक्षा (एएफसीएटी) के परिणाम 7 जून को घोषित किए गए थे। परीक्षा में, देश भर से विभिन्न परीक्षण केंद्रों में 6 लाख से अधिक छात्र उपस्थित हुए थे। इसके अलावा, आंचल देश भर से चयन हुए 22 छात्रों में से एक है और मध्य प्रदेश से चयन होने वाले छात्रों में से एक है।
आचाल के पिता सुरेश गंगावाल, जो चाय स्टाल चलाते हैं, उनका परिणाम जारी होने के बाद कहना था कि "अब हमारे पूरे जिले में हर कोई मेरे 'नामदेव' चाय स्टाल के बारे में जानता है और जब लोग आते हैं और मुझे बधाई देते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है,"।


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इसके अलावा, सुरेश ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी वित्तीय स्थिति को अपने तीन बच्चों की शिक्षा में बाधा बनने नहीं दिया। सुरेश ने कहा, "मैंने इंदौर में कोचिंग के लिए आंचल को भेजने के लिए लोन लिया था और मेरे बड़े बेटे की इंजीनियरिंग के लिए भी उसको ऐसे ही पढ़ाया था। अब मेरी सबसे छोटी बेटी 12वीं क्लास में है।"



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