Wednesday, 25 January 2017

Best Of Shayari By Mirza Ghalib

Best of shayari by Mirza Ghalib, The king of Hindi and Urdu poetry presents his best creation for you.

Best Of Shayari By Mirza Ghalib
Best Of Shayari By Mirza Ghalib



When we talk about best shayari,best of shayari or poet than only one name appears in our mind and that is Mirza Ghalib. The person who changed the direction of Hindi and Urdu shayari,

He presented his though the combination of creative words giving us a sacred and emotional messages that we know today as Hindi shayari. We are sharing some of the best of shayari by Mirza Ghalib. His best work is shared with you.

Mirza ghalib not only shared his thoughts but showed us mirror of society through the Hindi shayari or Urdu shayari.

Best of shayari by Mirza Ghalib In Hindi And Urdu


देखिये पाते हैं उश्शाक़, बुतों से क्या फ़ैज़;
एक ब्राह्मण ने कहा है, कि यह साल अच्छा है!
~ Mirza Ghalib
 
सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब,
नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।
~ Mirza Ghalib

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
~ Mirza Ghalib

दुख देकर सवाल करते हो,
तुम भी गालिब, कमाल करते हो;

देख कर पुछ लिया हाल मेरा,
चलो इतना तो ख्याल करते हो;

शहर-ए-दिल मेँ उदासियाँ कैसी,
ये भी मुझसे सवाल करते हो;

मरना चाहे तो मर नही सकते,
तुम भी जीना मुहाल करते हो;

अब किस-किस की मिसाल दूँ तुमको,
तुम हर सितम बेमिसाल करते हो।
~ Mirza Ghalib

बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह,
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है।
~ Mirza Ghalib
 
ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना;
बन गया रक़ीब आख़िर था जो राज़-दाँ अपना।
~ Mirza Ghalib

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम-कश को;
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।
~ Mirza Ghalib
 
मशरूफ रहने का अंदाज़ तुम्हें तनहा ना कर दे 'ग़ालिब';
रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं।
~ Mirza Ghalib

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है;
तुम्ही कहो कि ये अंदाजे-गुफ्तगू क्या है;

न शोले में ये करिश्मा न बर्क में ये अदा;
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंद-ख़ू क्या है;

ये रश्क है कि वो होता है हमसुखन तुमसे;
वरगना खौफे-बद-अमोजिए-अदू क्या है;

चिपक रहा है बदन लहू से पैरहन;
हमारी जेब को अब हाजते-रफू क्या है;

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा;
कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है;

बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता;
वगरना शहर में ग़ालिब कि आबरू क्या है।
~ Mirza Ghalib
 
तुम न आए तो क्या सहर न हुई;
हाँ मगर चैन से बसर न हुई;
मेरा नाला सुना ज़माने ने;
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।
~ Mirza Ghalib

Best of shayari by Mirza Ghalib Picture Quotes In Hindi

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